Matlabi Shayari in hindi | मतलबी शायरी

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Matlabi Shayari in hindi

मतलबी शायरी

matlabi shayari

1
मतलब से याद करते है लोग
यहां कोई किसी का अपना नहीं होता
सबके दिल मै होगी है नफरत
गले लगाने से कोई अपना नहीं होता।।

2
मुंह पर बढ़ाई करते है
ओर दिल मै खोट रखते है
कुछ लोग यहां
यही व्यापार करते है।।

3
जमाने का हर चहेरा देखा है मैने
लोगो को धोका देखा है मैने
अपने मतलब के लिए
ज़िन्दगी से खिलवाड़ होते देखा है मैने।।

4
हम जिन्हें अपना खास मानते है
वो सिर्फ हमे टाइमपास मानते है
काम होने पर याद करते है हमे
वरना वो हमे सिर्फ फालतू मानते है।।

5
झूठी हमदर्दी दिखाकर सारे राज जान लेते है
वो फिर हमे इस कदर पहचान लेते है
हमारी कमजोरी का फायदा उठाकर
अपने मतलब की रोटी सेंक लेते है।।

6
ज़िन्दगी मै कुछ लोगो से दूर रहता हूं
उनको पहचानता हूं मै अच्छे से
उनकी दगाबाजी से दूर रहता हूं।।

7
अब किसी ओर से क्या शिकायत करे
यहां तो अपना यार भी मतलबी निकला
उसका रिश्ता दिल से नहीं था
उसका रिश्ता तो पैसो से निकला।।

8
अब जमाने मै किसी का यकीन नहीं करना
अब किसी से कभी प्यार नहीं करना
लोग मतलबी है यहां पर
अब कभी किसी पर ऐतबार नहीं करना।।

9
गलती हो गई हमसे जो प्यार कर बैठे
उस बेवफा पर ऐतबार कर बैठे
वो तो सिर्फ मतलब निकाल रही थी अपना
हम ही उसे मोहब्बत समझ बैठे।।

10
आज उसकी हर हद देख ली हमने
उसकी बेवफाई भी देख ली हमने
अब उससे दूरी बनाकर रखते है
वो नहीं चाहती है हमे तो ना सही
हम भी मतलबी लोगो से रिश्ता नहीं रखते है।।

11
आज फिर उन्हे हमारी याद आई है
शायद आज फिर कोई मुसीबत आई है
ऐसे तो नहीं करते है वो हमे याद
शायद फिर उनकी कोई बुरी घड़ी आई है।।

12
जिस पर सबसे ज्यादा यकीन करो
वहीं आना मतलब सीधा करता है
प्यार कि आड़ लेकर
वो हमे धोका देता है।।

13
कोई यकीन करने के काबिल ना रहा
किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता
लोग होते है सिर्फ मतलबी
किसी को अपना नहीं कहा जा सकता।।

14
हम उन पर ऐतबार करते रहे
उन्हे दिलोजान से प्यार करते रहे
वो तो निकले बेवफा सनम
ओर हम उनसे मोहब्बत करते रहे।।

15
अब वो कहता है मुझ पर यकीन करो
पर उसका हर चेहरा देख चुका हूं मै
नफरत करता हूं अब उससे
उसका मतलब देख चुका हूं मै।।

16
जमाने को कोई खबर नहीं
हमे कोई अपना नहीं मिला
जो मिला मतलबी मिला
कोई दिल का सच्चा नहीं मिला।।

17
लोग किसी के सगे नहीं होते
उन पर कभी यकीन मत करना
फितरत मै है उनके धोका देना
तुम उन पर कभी ऐतबार मत करना।।

18
सफर मै कोई मिल जाता है
कोई दिल मै करीब हो जाता है
क्या पता था वो भी है मतलबी
पर इस दिल को तो उससे प्यार हो जाता है।।

19
मैने सच के पीछे झूठ का नकाब देखा है
इंसान को बदलता हुआ चहेरा देखा है
लोग कहते है मुझे बुरा
लेकिन मैने धोखेबाजों को अच्छा बनते देखा है।।

20
मेरी बराबरी क्या कर पाओगे
मुझसे कैसे आंख मिला पाओगे
तुम्हारा हर चहेरा देख चुका हूं मै
अब मुझसे कैसे अपनी करतूतें छुपाओगे।।

21
दुनिया मै प्यार बचा ही नहीं है
अब सिर्फ मतलब का रिश्ता रह गया है
लोग कहते रहे जो कहना है
उनसे हमारा दुर का रिश्ता रह गया है।।

22
अब हमे भी अपना अंदाज बदलना पड़ेगा
लोगो कि तरह रहना पड़ेगा
यहां चलता है सिर्फ झुठो का राज
हमे भी अब झूठ बोलना पड़ेगा।।

23
सामने कुछ ओर, हकीकत कुछ और रखते है
कुछ लोग सिर्फ मतलब से रिश्ता रखते है।।

24
जमाना कुछ भी कह ले
पर हकीकत बदल नहीं सकती
कुछ लोग होते है धोखेबाज
उनकी फितरत कभी बदल नहीं सकती।।

25
सब लोगो की हकीकत देख ली
मतलबी लोगो कि दोस्ती देख ली
अब नहीं रहा किसी पर यक़ीन
हमने आज दोस्त की फितरत भी देख ली।।

26
जो लोग ज्यादा मीठा बोला करते है
वो दिल मै नफरत रखा करते है
बाहर से अच्छे ओर अंदर जहर भरा रखते है।।

27
मतलब से चल रही है दुनिया
लोग प्यार को खुदा मानते है
कुछ लोग ऐसे भी है दुनिया मै
जो हमे दुश्मन मानते है।।

28
मैने सोचा था वो सच्ची मोहब्बत करती है
वो तो मेरे दिल से खेल रही थी
मै तो करता था उससे सच्चा प्यार
मगर वो तो मतलब की भाषा बोल रही थी।।

29
उसके बारे मै क्या कहूं
उस पर सबसे ज्यादा यकीन किया था
मैने इसे माना था अपना खुदा
उस पर ऐतबार किया था।।

30
किस गलतफहमी मै जी रहे है
किन लोगो को अपना कह रहे हो
तुम क्या सोचते हों वो तुम्हारे है
आजकल कोनसा नशा कर रहे हो।।

31
हर शख्स बुरा नहीं होता
पर अब ये दिल किसी पर यकीन नहीं करता
जो भी मिला धोखेबाज मिला
इसलिए ये अब किसी पर ऐतबार नहीं करता।।

32
याद उसकी बहुत आती है
मगर अब उससे दूरी बनाए रखता हूं
वो तो निकली मतलबी फरेबी
उससे अब इश्क नहीं जताया करता हूं।।

33
किन लोगो को अच्छा बता रहे हो
अपने पैरो पर खुद कुल्हाड़ी मार रहे हो
कोई नहीं है यहां अपना मुर्शीद
तुम किससे प्यार का रिश्ता निभा रहे हों।।

34
जमाने के साथ चलना सीख लो
तभी इस दुनिया मै रह पाओगे
अगर ज्यादा हमदर्दी दिखाई किसी से
तो हर वक्त धोका ही खाओगे।।

35
वो तो मुझे इस्तेमाल करती रही
मै उसको प्यार समझ बैठा
मैने सोचा वो करती है मोहब्बत
मै उसके झूठ पर ऐतबार कर बैठा।।

36
अब जमाना मुझे अच्छा नहीं लगता
मै किसी से क्या कह पाऊंगा
दुनिया अब रही नहीं है मेरी
मै क्या किसी से रिश्ता निभाऊंगा।।

37
कोई किसी का अपना नहीं होता
कोई हमारा सगा नहीं होता
लोग बस रखते है मतलब से रिश्ता
आजकल भाई भी अपना नहीं होता।।

38
जिस पर सबसे ज्यादा यकीन करो
वो ही धोका दे जाता है
हमसे रिश्ता तोड़कर
वो हमे दगा दे जाता है।।

39
जमाने की एक खूबसूरती देखी है हमने
झूठ की भी सूरत देखी है हमने
आप कहते हो दूसरो को मतलबी
अपने के हाथों मौ खंजर देखी है मैने।।

40
सफर जिंदगी का चल रहा है
लोग आते जाते रहते है
कोई नहीं है यहां किसी का
लोग मतलब से रिश्ता रखते रहते है।।

41
जमाने की सच्चाई को किस तरह ठुकराओगे
यहां तो सब मतब्ली है मुर्शीद
तुम किसे गले लगाओगे।।

42
मै भी उन लोगो से रिश्ता नहीं रखता
जो मेरे नहीं है, मै रहता हूं उनके पास
जिनको मुझसे कोई मतलब नहीं है।।

43
हर घड़ी उसका इंतज़ार किया मैने
पर वो अब तक नहीं आया
फिर पता चला वो तो जा चुका है
मतलबी था इसलिए नहीं आया।।

44
अपना काम निकालने की तरकीब
लोग अच्छे से जानते है
हमे धोका देना लोग अच्छे से जानते है
कौन कहता है हम है बेवफा
हम उनका हर मतलबी चहेरा पहचानते है।।

45
कितने शातिर हो गए लोग
किसी पर यकीन नहीं कर सकते
जो कहता है खुद को अपना सगा
उस पर भी ऐतबार नहीं कर सकते।।

46
दुनिया का यही दस्तूर पुराना है
लोगो से रिश्ता वहीं पुराना है
अब उनकी नीयत बदल चुकी है
वरना आज भी सच्चाई का जमाना है।।

47
कुछ लोगो को हमारी जरूरत होती है
वो हमे सिर्फ मतलब से याद करते है
अपना काम हो जाने पर
वो हमारा नाम भी याद नहीं रखते है।।

48
जितना किसी के पास जाओगे
उससे उतना ही धोका खा जाओगे
किसी से मत करना मोहब्बत
वरना बाद मै फिर पछताओगे।।

49
जो लगे सामने बुराई कर लेते है
वो तो बहुत अच्छे होते है
लेकिन जो पीठे पीछे कहते है
वो ही लोग मतलबी होते है।।

50
अब क्या किसी से शिकायत करे
किसी ने हमारे साथ वफ़ा नहीं कि
हर शक्श निकला मतलबी
किसी ने सच्ची मोहब्बत नहीं कि।।

Final Words:

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