पत्नी को मनाने की शायरी

हेल्लो दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपके साथ पत्नी को मनाने की शायरी शेयर करने वाले है जिसको पढ़कर आपकी रूठी हुई पत्नी मान जाएगी.

पति पत्नी का रिश्ता ऐसा होता है की कभी कभी हमारी बीवी हमसे नाराज हो जाती है और वो रूठ जाती है और फिर उसको मनाना थोडा मुश्किल हो जाता है.

लेकिन सच मानिये दोस्तों अपनी वाइफ को मनाना इतना भी मुश्किल नहीं होता है आपको केवल उसकी थोड़ी तारीफ करनी होती है और उसके साथ अच्छे से बात करना होता है.

अगर आपकी पत्नी आपसे नाराज हो गयी है तो आप उसके साथ ये शायरी को शेयर करे और फिर देखना उसका गुस्सा कैसे दूर हो जाता है. तो फिर चलो देर किस बात की सीधे पोस्ट को स्टार्ट करते है.

पत्नी को मनाने की शायरी

patni ko manane ki shayari

1
तुम अगर मुझसे यूं ही नाराज बैठी रहोगी
और तुम अगर यूं ही मुझ से उदास रहोगी
तो फिर कैसे हम दोनों इस सफर को निभा पाएंगे
और इस रिश्ते को हम कैसे आगे ले जा पाएंगे

2
तुम्हारी नाराजगी तो मुझसे एक पल भी बर्दाश्त नहीं होती
मैं तुमसे एक पल के लिए भी दूर नहीं रह सकता
अब तो मान भी जाओ और अपना गुस्सा छोड़ दो ना
मैं तुम्हारे बिना जिंदगी नहीं जी सकता

3
मैं तुम्हें ही अपना सब कुछ मानता हूं
मैं तुम्हें अपनी जान मानता हूं
तुम ही मेरी जिंदगी की वह खुशनुमा हसीन शाम हो
जिसे मैं हर वक्त ख्वाबों मैं देखता हु

4
मैंने तुम्हारे लिए सब कुछ किया है
जो जो तुमने कहा है वह मैंने माना है
तो तुम्हारी नाराजगी की वजह क्या है यह भी बता दो
आखिर मेरी खता है क्या है वह भी बता दो

5
हम तुम्हे मना लेंगे पर तुम अपनी
नाराज होने की वजह तो बताया करो
हमसे कौन सी गलती हो गई है इतनी बड़ी वो
तो हमें समझाया करो

6
हर बार तुम्हारा मुझसे यूं रूठ जाना
मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया
मैं तुम्हें कितनी मोहब्बत करता हूं
यह शायद तुम्हें कभी समझ नहीं आया
तुम हमेशा अपनी ही गुरुर में रहती हो
तुम्हें मेरा प्यार कभी समझ नहीं आया

7
मैंने तुम्हें अपना दिल दिया है
मैंने तुम्हें अपना सब कुछ माना है
मैंने तुमसे की है मोहब्बत
मैंने तुम्हें अपना दिलो जान से माना है

8
आज वो मुंह फुला कर बैठी है
मुझसे कोई जान मांग लेता तो मैं दे देता
मगर वहीं खुद मेरी जान है
और मैं उसे इस तरह उदास नहीं देख सकता हूं
वह आज मुझसे ज्यादा परेशान है

9
मैं कहां जाऊंगा तुम्हारे बिना
मैं तुम्हें छोड़ कर जा भी नहीं सकता
और तुम नाराज रहोगी हो जाए ऐसे मुझसे
तो फिर मैं तुम्हें मना भी नहीं सकता

10
तुम्हें किस तरीके से मनाया जाए
चलो तुम्हें कहीं बाहर ले जाया जाए
हम दोनों घूमने चलेंगे कहीं बाहर
और तुम्हें फिर से वही पुरानी याद वापस लाई जाए

11
हम दोनों कितने खुश रहा करते थे
हम दोनों एक दूसरे से मोहब्बत किया करते थे
पता नहीं किस की नजर लग गई हम दोनों को
अब तो हम में सिर्फ लड़ाई यहां होती हैं
मोहब्बत तो कहां बची है हमारे बीच
अब तो सिर्फ रूठना मनाना होता है

12
रूठने मनाने का भी एक अलग मजा होता है
मैं तुम्हें दिल से मनाना चाहता हूं
पर एक बार उठ जाओ तो मना भी लूं मैं
तुम्हें हजार बार मना नहीं सकता

13
दिन में एक लाख बार तो तुम मुझसे नाराज होती हो
पर मैं तुम्हें एक लाख बाहर ही मना लेता हूं
पर तुम इस तरह हर बार मुझसे नाराज ना रहा करो
वरना फिर मेरा दिल भी कहता है
कि मैं तुम्हें क्यों बार-बार मना लेता हूं

14
तुम इतनी हसीन और इतनी खूबसूरत लगती हो
तुम मुझे अपनी जान लगती हो
मैं तो नहीं मानता हूं अपना सब कुछ
तुम मुझे मेरा हसीन जहां लगती हो

15
जब से मैंने तुम्हें देख रहा था मैं सब कुछ भूल गया था
मैंने सिर्फ तुम्हें याद रखा था मैं अपने आप को भूल गया था
तुम ही मेरी जिंदगी थी यह मैं मानता था
मैंने अपना सब कुछ छोड़ दिया था

16
मैं सिर्फ तुम्हारे और तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं
तुम जितनी बार रूठ जाओगी
मैं तुम्हें इतनी बार मनाना चाहता हूं
कितना लिखूं मैं तुम्हें अपनी शायरियों में
मैं तो सिर्फ मोहब्बत के किस्से भी तुम्हें सुनाना चाहता हूं

17
मैंने तुम्हें कितना मनाया है
यह मैं शायद तुम्हें बता नहीं सकता
तुम्हें हर वक्त मेरे सीने से लगाया है
यह मैं तुम्हें समझा नहीं सकता
अब मोहब्बत का हर कोई सबूत देना है
तो वह मैं नहीं दूंगा
क्योंकि अब मैं मोहब्बत में अपने आप को
और गिरा नहीं सकता

18
मोहब्बत तुमसे है और तुमसे ही रहेगी
तुम्हारे दूर जाने से वह कम नहीं हो जाएगी
मेरी याद तुम्हें ही आएगी
और तुम्हारे दूर जाने से वह कम नहीं हो जाएगी
मैंने हमेशा चाहा है तुम्हें और तुम्हें ही चाहता रहूंगा
मेरी मोहब्बत कभी दूर नहीं हो जाएगी

19
मैं तुम्हें कभी खुद से दूर करना नहीं चाहता
मैं कभी तुम्हें भुलाना नहीं चाहता
तुम मेरे दिल में रहना हमेशा
मैं तुम्हें कभी खुद से दूर करना नहीं चाहता

20
सफर जिंदगी का ऐसे ही निकल जाएगा
यहां कौन मुझे भुला पाएगा
मैं हमेशा रहता हूं उसके पास उसके बाहों में
कौन मुझसे दिल लगा पाएगा

21
जो भी हो नाराज हो जाती है
तो फिर मैं उसे अपनी बाहों में भर लेता हूं
उससे मोहब्बत और प्यार करके उसका गुस्सा दूर कर देता हूं पर यह तो उसके रोजाना का बहाना है
उसे रूठना नहीं है और फिर भी मुझे ही है उसे मनाना

22
वह जानबूझकर मुझसे रूठ जाती है
वह जानबूझकर कर मुझसे दूर चाहती है
ताकि मैं उसे मना लूंगा और उसे गले से लगा लूं
इसलिए वह हर बार मुझसे गुस्सा हो जाती

23
मैं उसके गुस्से को अब और ज्यादा सही नहीं सकता
मैं उससे अब और ज्यादा मोहब्बत कर नहीं सकता
मैंने उसे ही अपना सब कुछ दे दिया है
हमने इसके अलावा उसे और कुछ दे नहीं सकता

24
मेरी खुशी मेरी ख्वाहिश है उस पर ही शुरू होती है
उस पर ही खत्म हो जाती हैं
मेरा दिल और मेरा रात भी वही है
मैं सिर्फ उसे ही मानता हूं अपना,,
मेरी जिंदगी का सुख और चैन भी वही।।

25
उसे कैसे में सफर मोहब्बत का दिखाऊं
उसे कैसे मैं अपनी मोहब्बत मनाऊं
कुछ नहीं मिला है उसे मेरे साथ
फिर मैं कैसे उसे अपना प्यार दिखाओ

26
मैंने उसे दिल से अपना मान लिया है
मैंने उसे अपना सब कुछ दे दिया है
वह तो नहीं आती है कभी मेरे पास
फिर भी मैं हमेशा उसके पास चला जाता हूं
और मैं उसे हमेशा मोहब्बत में
वफा का हर बार सबूत दे जाता हूं

27
मैंने उसे अपना माना है और सिर्फ उसे ही अपना माना है
मैंने उसे चाहा है और सिर्फ उसे ही चाहा है
वह ही मेरी मोहब्बत है जानता हूं मैं
मैंने सिर्फ उसे ही अपनी मोहब्बत माना है

28
सफर जिंदगी का ऐसा ही चलता जाएगा
यहां कौन कब किसके पास आएगा
मैंने सब कुछ किया है उसके लिए
उसके लिए ही करता रहूंगा
पर कौन मुझे यहां पर भुला पाएगा

29
तुम मेरी हमसफर हो हम दोनों को साथ साथ चलना है
इस तरीके से रूठना मनाना छोड़ कर
हम दोनों को जिंदगी में आगे बढ़ना है
पर अगर तुम इसी तरीके से नाराज रहेगी
तो हम क्या कर पाएंगे
शायद हम इस रिश्ते को फिर निभा नहीं पाएंगे

30
हर दिन की लड़ाई और हमारे बीच होती रहेगी
तो फिर हम इस रिश्ते को ज्यादा दूर तक ले जा नहीं सकते
एक दिन हम दोनों को ही छोड़ना होगा एक दूसरे का साथ
और हम यह कभी कर नहीं सकते

31
मोहब्बत तुम हो मेरी और तुम ही मेरी सब कुछ हो
मैं तुम्हें अपनी जिंदगी और जान मानता हूं
तुम ही मेरी सब कुछ हो
फिर इस तरीके से मुझसे नाराज ना रहो
तुम मेरे दिल की धड़कन हो

32
तुम तो नाराज होती हो तब भी बहुत खूबसूरत लगती हो
दिल करता है तुम्हें अपनी बाहों में भर लूं
तुम मुझे इस जहां में सबसे ज्यादा प्यारी लगती हो

33
तुम्हारे जितना कोई हसीन हो नहीं सकता
तुम्हारे जितना कोई प्यारा हो नहीं सकता
तुम ही मेरी जिंदगी की इकलौती सफर हो
तुम्हारे बिना कोई मेरा हमसफ़र हो नहीं सकता

34
मैं तुम्हारे साथ जिंदगी का हर लम्हा जीना चाहता हूं
मैं सिर्फ और सिर्फ तुम से मोहब्बत करना चाहता हूं
तुम जहां ले जाओगी मैं चलने के लिए तैयार हूं अब
मैं सिर्फ और सिर्फ मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं

35
मैं घर के कामों में भी तुम्हारा हाथ बढ़ा दिया करूंगा
मैं तुम्हें हर वक्त सीने से लगा लिया करूंगा
मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हें ही चाहता हूं दिलो जान से
मैं तुम्हें अपना बना लिया करूंगा

36
सफर जिंदगी और मोहब्बत ऐसे ही चलता रहता है
हम दोनों एक दूसरे से ऐसे ही मिलते रहते हैं
जिंदगी गुजर जाती है ऐसे ही राहों में
और हम दोनों नाराज होकर ऐसे ही बैठे रहते हैं

37
नाराज होने से कभी कुछ नहीं होता
एक दूसरे से दूर जाने से कभी कुछ नहीं होता
हमेशा रहोगे दूसरे के साथ और अपनी बात मानो
क्युकी अक्सर किसी से खफा होने से कुछ नहीं होता

38
सफर हमने कुछ इस तरह तय किया है
हमने एक दूसरे के साथ हर एक लम्हा जिया है
वह मेरी जिंदगी लगती है मैं यह हमेशा उसे बताता हूं
मैंने उसे हमेशा अपने पास गुलाब की तरह रखा है

39
वह आज मुझसे नाराज बैठी है
उसे मनाने का कोई तरीका तो बताओ
मैं उसे सीने से लगा लेता हूं जब वह नाराज होती है
पर कोई उसे मेरे पास तो बुलाओ

40
आज तो तुम मान ही नहीं रही हो
तुम शायद मेरी मोहब्बत को पहचान ही नहीं रही हो
इसीलिए तुम उदास बैठी हो मुझसे दूर
मुझे तुम शायद मुझे अपना मान ही नहीं रही हो

41
रात को क्या होता है हमारे साथ ये सिर्फ हम जानते हैं
हम तुम्हारी नाराजगी को भी पहचानते हैं
पर हमने कभी तुमसे नाराज भी नहीं जताई
क्योंकि हम तुम्हें अच्छे से जानते हैं

42
वह सही अपना सब कुछ मानती है
उसे ही अपना दिल देती है
मुझसे तो सिर्फ नाराज रहती है वह
क्योंकि वह सब कुछ उसको बता देती है

43
मेरे से तो उसे मनाना नहीं चाहता
और दूसरों की बातों पर वह मान जाती है
मैं जब हंसता हु तब तुम हंसतीनहीं है
और दूसरों की बातों का ठहाका लगा जाती

44
मैं तुम्हें मना रहा हूं आज
मैं तुम्हें अपनी मोहब्बत भी दिखा रहा हूं
चलो मैं तुम्हें कहीं ले चलता हूं इस जहां से दूर
जहां सिर्फ हम दोनों हो देखो मैं तुम्हें आज भी
तुमसे मोहब्बत निभा रहा हूं

45
जब भी तुम हंसती हो तो बड़ी प्यारी लगती हो
यह उदास चेहरा तुम्हारे ऊपर जचता नहीं है
तुम सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत हो मेरी
तुम्हारे ऊपर यह उदासी जमती नहीं है

46
तुम इस तरीके से उदास मत रहा करो
तुम इस तरीके से मुझसे दूर मत रहा करो
तुम मेरी मोहब्बत होगी जानती हो तुम
तो फिर मुझसे इस तरह से गुस्सा मत रहा करो

47
तुम्हारा गुस्सा और तुम्हारी नाराजगी
में ज्यादा देर तक सह नहीं सकता
मैं तुमसे ज्यादा देर तक दूर रह नहीं सकता
तुम जानती हो मैं तुम्हें अपनी जिंदगी मानता हूं
मैं तुमसे दूर कभी जा नहीं सकता

48
हम दोनों ही एक दूसरे से दूर चले जाएंगे
हम दोनों में ही एक दूसरे के पास कभी नहीं आएंगे
हम सिर्फ सही करेंगे मोहब्बत जिसको चाहते हैं
हम तुम्हें कभी इश्क में अब कभी दोबारा मना नहीं पाएंगे

49
मैंने तुम्हें मनाने की हर कोशिश की है
अब तुम मुझसे यह नहीं कह सकती
कि मैंने तुम्हें मनाया नहीं है
हर बार तुम ही नाराज होती हो
तुमने तो कभी मुझे प्यार दिखाया नहीं है

50
जब भी तुम नाराज हो जाती हो
मैं तुम्हारे पास चला आता हूं
मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हें ही मनाता हूं
मैंने तुमसे की है मोहब्बत
और मैं तुम्हें अपना सब कुछ बताता हूं

51
मैंने तुमसे चाहत मैंने तुमसे मोहब्बत की है
मैंने सिर्फ और सिर्फ तुमसे इबादत की है
वो रहता है कहां मैं नहीं जानती हूं
मैंने सिर्फ और तो सिर्फ तुमसे ही मोहब्बत की है

52
तेरी मोहब्बत में तो मैंने जीना सीखा है
तेरे साथ ही तो मैंने चलना सीखा है
तेरे मिलने से पहले तो मैं कुछ भी नहीं था
तेरे मिलने के बाद सही मैं इस दुनिया में रहना सीखा है

53
तुम्हारे बिना रहने पर में एक पल भी सोच नहीं सकता
मैं कभी तुमसे दूर जा नहीं सकता
तुम मेरी जिंदगी हो यह मैं मानता हूं
मैं कभी तुम्हें भुला नहीं सकता

54
सफर जिंदगी का या सही चल जाएगा
कोई हमसे यहां कब मिल पाएगा
हम रहते हैं हमेशा उनके इंतजार में
पर क्या वह कभी मेरे पास आएगा

55
मैंने हमेशा उससे मोहब्बत की
मैंने हमेशा उसे चाहा है
मैंने हमेशा उसे अपना माना है
और उसे ही अपना प्यार दिखाया है

56
मुझसे दूर जाने को दिल नहीं करता
उसको दूर भेजने का दिल नहीं करता
वह हमेशा रहती है मेरे दिल में
उससे नाराज होने पर कभी मन नहीं होता

57
वह अपनी नाराजगी की वजह कभी बताती भी नहीं है
वह कभी मुझे अपने पास बुलाते भी नहीं है
वह तो हमेशा ही रहती है अपने आप में खुश हूं
कभी मुझे अपना बताती भी नहीं है

58
मैं उसे हर बार मनाया करता हूं
मैं उसे हर बार सीने से लगाया करता हूं
उसकी मोहब्बत तो शायद कम हो चुकी है मेरे लिए
मैं उसे अपनी जान माना करता हूं

59
हर बार मैंने उसे दिल से लगा कर मना लिया
हर बार मैंने उसे अपना बना लिया
वह रही किसी के भी इंतजार में
मगर मैंने उसे सीने से लगा लिया

60
उसकी नाराजगी की वजह तो मुझे पता ही नहीं है
मैंने शायद किसी पर गुस्सा कर दिया
इसीलिए वह मुझसे नाराज बैठी है
आज भी वह किसी और को अपना मानती है
और मुझसे दूर दूर बैठी है

61
वह मुझसे रूठ जाती है फिर वह मेरे पास नहीं आती है
मैं उसे कितना भी मनाने की कोशिश कर लूं
वह मुझे प्यार नहीं दिखाती है

62
सफर सफर उसके साथ ऐसे ही निकल जाता है
हंसी मजाक में हमारा भी दिन ढल जाता है
वह नाराज होती है और मैं उसे मनाने लगता हूं
इसी तरह हम दोनों का सफर चलता जाता है

63
मैं जब भी उसे सीने से लगाया करता हु
फिर मैं सिर्फ उसकी बाहों में सोया करता हूं
मुझे सुकून मिलता है उसके पास आकर
और मैं उसे ही अपने दिल से लगाया करता हूं

64
तुम्हारी तारीफ में मैं आज कुछ कहना चाहता हूं
मैं तुम्हारे हुस्न की कसीदे पढ़ना चाहता हूं
तुम नहीं जानती शायद तुम कितनी खूबसूरत हो
मैं तुम्हें अपने आपको आईने में दिखाना चाहता हूं

65
तुम जो कहोगी मैं तुम्हारी हर बात मान लिया करूंगा
मैं तुम्हारे लिए आज से खाना भी बना दिया करूंगा
तुम बस यह नाराजगी जताना छोड़ दो मुझसे गलती हो गई
मैं तुम्हारी हर बात को समझ लिया करूंगा

66
गलती इंसान से ही होती है और मैं अपनी गलती मानता हूं
तुम मुझे माफ भी कर दो ना
मैं तो सिर्फ तुम्हारे पास रहना चाहता हूं
चलो आगे से मेरे से गलती नहीं होगी
अब मान भी जाओ मैं तुम्हें मनाना चाहता हूं

67
मुझे कभी भी मनाना नहीं आता
तुम मुझसे इस तरीके से रुठा मत किया करो ना
तुम्हारी नाराजगी मेरी जान ले लेती है
तुम मुझसे कभी इस तरह दूर मत रहा करो ना

68
शायद तुम्हें मेरी खुशी बर्दाश्त नहीं होती
इसीलिए तुम मुझसे नाराज हो गई हो
क्योंकि तुम भी जानती हो तुम नाराज रहोगी
तो मैं भी दुखी होता हूं और फिर मैं बहुत ज्यादा रोता हूं

69
शायद तुमने आज फैसला कर ही लिया है
मुझसे दूर जाने का फैसला कर ही लिया है
इसीलिए तुम आज मुझसे नाराज हो और दूर-दूर हो शायद तुमने आज मुझसे रिश्ता तोड़ने का फैसला कर लिया है

70
देखो अगर तुम मुझसे इस तरीके से नाराज रही
तो फिर मैं तुमसे दूर चला जाऊंगा
फिर तुम रहना अकेली यहां पर अपनी नाराजगी में
और फिर मैं वापस कभी नहीं आऊंगा

71
अगर तुमसे थोड़ी सी भी मोहब्बत करती हो तो मान जाओ ना मेरे इश्क को तुम पहचान जाओ ना
किस तरह करूं मैं तुमसे मोहब्बत का इजहार
तुम ये रूठना मनाना छोड़ कर मेरे गले से लग जाओ

72
मैंने तुम्हें कितनी मोहब्बत से अपना माना है
मैंने तुम्हें अपना सब कुछ दिया है
मैंने तुम ही सही प्यार किया है
मैंने तुमसे ही इश्क का इजहार किया है

73
तुम मेरे पास कभी नहीं आती
तुम मुझसे मोहब्बत कभी नहीं सताती
मैं तुम्हें हमेशा मानता हूं अपना
पर तुम मुझे कभी अपना नहीं मानती

74
तुम्हें मोहब्बत किस तरह दिख रहा है
हम तुम्हें अपने दिल का हाल कैसे समझाएं
हम तुम तो जानती ही नहीं हो क्या चलता है हमारे दिल में
फिर तुम्हें कैसे अपनी मोहब्बत दिखाएं हम

75
जिंदगी ऐसे ही गुजर जाएगी हमने कभी सोचा नहीं था
हमें तुमसे मिल जाएंगे ये हमने सोचा नहीं था
सफर ऐसे ही निकल जाएगा हमें मालूम नहीं था
इश्क और मोहब्बत ऐसे ही चला जाएगा हमें मालूम नहीं था

76
हमने उसके लिए क्या-क्या नहीं किया
हमने क्या उससे इश्क और मोहब्बत नहीं किया
हम उसे हमेशा अपना मानते हैं
कि हमने उसे अपना दिल नहीं दिया

77
सफर ऐसे ही चला जाएगा वह मेरे पास कभी नहीं आएगा
मैं उसे मनाता ही रहूंगा जिंदगी भर
लेकिन वह शायद ही मुझसे मोहब्बत कर पाएगा

78
जिंदगी में जिंदगी का एक अलग ही मजा होता है
सफर हमारे साथ इतना ही खूबसूरत होता है
मैं शायद कुछ नहीं मानता हूं किसी को
यह जिंदगी का हर लम्हा इतना खूबसूरत होता है

79
तुम्हारे बिना हमें जिंदगी गुजार नहीं सकते
तुमसे दूर हम कभी जा नहीं सकते
हम तुम्हें ही तो मानते हैं सब कुछ अपना
हम तुम्हें इस तरह भुला नहीं सकते

80
तुम यह मुझसे आज क्या कह रही हो
तुम मुझसे गुस्से में आज कुछ भी कह रही हो
तुम कह रही हो मैं तुम्हें छोड़ कर चला जाऊंगा
तुम जानती हो मैं तुम्हें छोड़ कर जा नहीं सकता
मैं तुम्हें खुद से कभी दूर कर नहीं सकता

81
हर बार तुम गुस्से और नाराजगी में कुछ भी कह देती हो
तुम मुझे शायद अपना मानती ही नहीं हो
इसलिए मुझसे कुछ भी कह देती हो
मैं हर वक्त तुम्हें मनाने की कोशिश करता हूं
और तुम मुझसे हर बार तो दूर चली जाती हो

82
मैं तुम्हें कैसे मनाऊं
मैं तुम्हें कैसे अपनी मोहब्बत कैसे दिखाऊं
मैंने तुमसे प्यार किया है ये मैं तुम्हें कैसे समझाऊं

83
हर बार क्या मुझे ही समझाना पड़ेगा
हर बार क्या मुझे अपनी मोहब्बत दिखाना पड़ेगा
तुम मेरे लिए क्या कभी कुछ नहीं कर सकती
क्या मुझे हर बार झुकना पड़ेगा

84
हर बार इश्क में मुझे ही झुकना पड़ता है
हर बार मुझे ही अपना रोना रोना पड़ता है
तुम तो मुझे कुछ भी मानती ही नहीं हो
हर बार मुझे ही तो मैं अपना सब कुछ दिखाना पड़ता है

85
हर बार में ही तो मैं मनाता हूं
तुमने तो शायद मुझे कभी मनाना ही नहीं सीख
मोहब्बत तो तुम करती ही नहीं हो मुझसे
तुमने मुझसे कभी प्यार जताना ही नहीं सीखा

86
हर बार यह जिंदगी निकल जाएगी
हर बार यह जिंदगी ऐसे ही गुजर जाएगी
मिलते कहां हैं हम एक दूसरे से जो मोहब्बत कर पाएंगे
यह नाराजगी रूठने मनाने में ही जिंदगी गुजर जाएगी

87
अब मैं समझ चुका हूं कि
तुम और मैं हम दोनों एक दूसरे के साथ चल नहीं सकते
क्योंकि तुम्हें हर बात में मुझ से नाराजगी है
हम दोनों कभी एक दूसरे के हो नहीं सकते
तुम हमेशा रहना अपने गुरुर में अपने साथ
हम दोनों कभी एक दूसरे से मोहब्बत निभा नहीं सकती

88
मैं क्या तुम्हें मना पाऊंगा
तुम तो किसी और की ही इंतजार में बैठी रहती हो
तुम्हें मुझसे कब होती है मोहब्बत
तुम तो किसी गैर का नाम ही अपनी जुबान पर लेती हो

89
चलो जाओ मैं तुम्हें हर बंधन से आजाद करता हूं
चलो जाओ मैं तुम्हें अपनी मोहब्बत से आजाद करता हूं
जिसके साथ चाहो रह सकती हो तुम
जिसे चाहो बात कर सकती हो तुम
मैं तुम्हें अपने हर वादे से आजाद करता हूं

90
अब तुम्हें कभी अपनी मोहब्बत दिखाऊंगा नहीं
अब मैं तुम्हें कभी मनाऊंगा नहीं
क्योंकि शायद तुमने कसम खा ली है मुझसे दूर जाने की
तो मैं फिर कभी तुम्हें रोकूंगा नहीं

91
तुम्हें मैंने हमेशा रोका तुम्हें मैंने हमेशा चाहा है
मैंने तुम्हें अपना सब कुछ माना है
मैंने तुम्हें ही अपना सब कुछ दिया है
फिर भी तुम मुझसे आज नाराज हो
जब कि मैंने तुमसे इश्क किया है

92
तुम जानती हो मुझे यह रूठना मनाना नहीं आता है
मुझे किसी को मनाना नहीं आता है
मैं सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत करना जानता हूं
मुझे किसी पर गुस्सा करना नहीं आता है

93
और तुम मुझसे कितनी नाराज होगी बता दो
और तुम मुझसे कितनी दूर रहोगी यह भी बता दो
मोहब्बत करो तुम किसी और से और मुझसे बेवफाई करो
चलो उसका नाम भी बता

94
मोहब्बत में हमेशा बेवफाई ही आती है
यह मैंने आज देख लिया है
मैंने तुम्हें हमेशा अपना माना है
मैंने तुम्हें अपना बना कर देख लिया है

95
मेरी जिंदगी में सिर्फ तुम ही हसीन किस्सा हो
तुम्हारे बिना तो मैं एक जिंदा लाश हूं
तुम चली जाओगी छोड़कर तो मैं जी नहीं पाऊंगा
तुम्हारे बिना तुम्हें हर पल उदास हु

96
आप कैसे तुम्हें समझाऊं मैं अपने दिल का हाल बताऊं मैं
हर बार बताना मुझे अच्छा नहीं लगता
और हर बार तुम्हारा ही रूठ ना मुझे अच्छा नहीं लगता

97
हर बार अपने दिल की बात बताई है मैंने उसे
पर उसने एक बार भी समझने की कोशिश नहीं की
वह सिर्फ आज भी छोटी-छोटी बातों पर नाराज होती है मुझसे उसने मुझसे कभी मोहब्बत करने की कोशिश नहीं की

98
आज भी जिंदगी मुझे उससे दूर कर रही है
आज कि मैं मर रहा हूं वह मुझे दूर ले जा रही है
मैं भूल चुका हूं सब कुछ अपना
वह सिर्फ और सिर्फ मुझे अपनी गुस्सा दिखा रही है

99
मैं यह नहीं जानता हूं तुम मुझसे नाराज है
मैं यह नहीं जानता वह मुझसे क्यों दूर है
मैं तो सिर्फ उसे अपना मानता हूं
मैं नहीं जानता हूं मुझसे क्यों उदास है

100
चलो आ जाओ मेरे पास अभी नाराजगी छोड़ भी दो ना
मेरी बाहों में आकर अपने गुस्से का सबब तोड़ भी दो ना
मैं तुम्हें फिर से उसी तरह मोहब्बत का इजहार करूंगा
तुम अपनी जिद छोड़ भी दो ना

101
तुम्हारी नाराजगी की आखिरी वजह
मुझे भी बता दो ना
अब तुम मुझसे क्यों नाराज हो
तुम यह भी मुझे समझा दो ना
मैंने तुमसे कितनी मोहब्बत की
यह शायद तुम भी नहीं जानती
तुम मुझे अब माफ भी कर दो ना

102
मैं तुमसे माफी मांग लेता हूं
मैं हर बार तुमसे दूर जाने का नाटक कर लेता हूं
पर मैं तुमसे दूर कभी जा नहीं पाया
मैं तुम्हारे बिना कभी नहीं पाया

Final Words:

तो दोस्तों ये था अपनी पत्नी को मनाने की शायरी, हम उम्मीद करते है की आपको ये सभी शायरी अच्छी लगी होगी और अगर आप अपनी बीवी को जल्दी से जल्दी मनाना चाहते हो तो इन शायरी को अपनी वाइफ के साथ जरुर शेयर करे और हमको पूरा विश्वाश है की उसकी नाराजगी तुरंत दूर हो जायेगा.

दोस्तों अगर आपको ये शायरी अच्छी लगी हो तो पोस्ट को १ लाइक जरुर करे धन्येवाद.

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