2 Line Shayari in Hindi | Two Line Shayari | Short Shayari Collection

2 Line Shayari in Hindi – Hello boys and girls welcome to our blog shayarihq.com today in this post we are going to share the best two line shayari in hindi. You can also call it as short shayari.

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2 Line Shayari in Hindi | Two Line Shayari in Hindi

Short Shayari Collection in Hindi

Two line shayari in hindi

अपना ही समझते हैं तुम्हें दिल-ओ-जाना हम तुम्हें;

दुश्मनों को तो कभी दिल में बसाया नहीं जाता।


क्यों हिज्र के शिकवे करता है क्यों दर्द के रोने रोता है;

अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है।


सब का तो मुदावा कर डाला अपना ही मुदावा कर न सके;

सब के तो गिरेबाँ सी डाले अपना ही गिरेबाँ भूल गए।


छुपे हैं लाख हक़ के मरहले गुम-नाम होंटों पर;

उसी की बात चल जाती है जिस का नाम चलता है।


लोग बेवजह ढूँढते हैँ खुदखुशी के तरीके हजार;

इश्क करके क्यों नहीँ देख लेते वो एक बार।


इतनी सी बात थी जो समन्दर को खल गई.

का़ग़ज़ की नाव कैसे भँवर से निकल गई.


उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर तो ना उठाओ,

जिसे हो शक़ वो मुझसे निभाकर देखे.


अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे याद करते हो तो अब मत करना,

क्योंकि मैं तन्हा जरूर हूँ . मगर फ़िज़ूल बिलकुल नहीं.


किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस खुदा ही जानता है,

दिल अगर बेनकाब होता तो सोचो कितना फसाद होता.


तुझसे अच्छे तो जख्म हैं मेरे

उतनी ही तकलीफ देते हैं जितनी बर्दाश्त कर सकूँ.


सुना है के तुम रातों को देर तक जागते हो

यादों के मारे हो या मोहब्बत में हारे हो.


मुहब्बत न सही मुकद्दमा ही कर दो मुझ पर

तारीख़ दर तारीख़ तेरा दीदार तो होगा.


चाहत देस से आनेवाले ये तो बता के सनम कैसे हैं?

दिलवालों की क्या हालत हैं, यार के मौसम कैसे हैं.


कुछ खास नही बस इतनी सी है मोहब्बत मेरी

हर रात का आखरी खयाल और हर सुबह की पहली सोच हो तुम.


जिसके लिए तोड़ दी मेंने सारी सरहदें

आज उसी ने कह दिय ज़रा हद में रहा करो.


क़ानून तो सिर्फ बुरे लोगों के लिए होता है

अच्छे लोग तो शर्म से ही मर जाते हैं.


बेगाना हमने नहीं किया किसी को,

जिसका दिल भरता गया वो हमें छोड़ता गया.


ना कोई एहसास हैं, ना कोई जज्बात हैं;

बस एक रूह हैं, और कुछ अनकहे अल्फाज हैं.


परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ;

अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था.


कौन चाहता है खुद को बदलना,

किसी को प्यार तो किसी को नफरत बदल देती है.


ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो दर्द की तुम शिद्दत,

दर्द तो दर्द होता हैं, थोड़ा क्या और ज्यादा क्या.


लिखना तो था के हम खुश है उसके बिना

मगर आसू निकल पड़े कलम उठाने से पहले.


इस नाज़ुक दिल में किसी के लिए इतनी मोहबत आज भी है यारो.

की हर रात जब तक आँखे ना भीग जाये नीद नही आती.


कुछ खास नही बस इतनी सी है मोहब्बत मेरी

हर रात का आखरी खयाल और हर सुबह की पहली सोच हो तुम.


ऐसा करते हैं तुम पर मरते हैं,

वैसे भी हमें मर ही जाना हैं.


इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी

चलने का न सही, सम्भलने का हुनर तो आ गया.


ज़नाज़ा इसलिए भारी था उस गरीब का

वो अपने सारे अरमान साथ लेकर गया था.


वक़्त मिला उसे तो हमें भी याद कर ही लेगा वो,

फ़ुरसत के लम्हों में हम भी बड़े ख़ास हैं उसके लिए.


खूश्बु कैसे ना आये मेरी बातों से यारों,

मैंने बरसों से एक ही फूल से जो मोहब्बत की है.


खुदा करे, सलामत रहें दोनों हमेशा.

एक तुम और दूसरा मुस्कुराना तुम्हारा.


पढ़ रहा हुं मैं इश्क की किताब अगर बन गया वकील तो ,

बेवफओं की खैर नही.


रोज कहाँ से लाऊँ एक नया दिल,

तोड़ने वालों ने तो मजाक बना रखा है.


एक कब्र पर लिखा था, किस को क्या इलज़ाम दूं दोस्तो.

जिन्दगी में सताने वाले भी अपने थे,और दफनाने वाले भी अपने थे.


जिस उम्र में हमारे दाँत टूटे थे,

आज-कल के बच्चों के उस उम्र में दिल टूट जाते हैं.


यहाँ सब खामोश है कोई आवाज़ नहीं करता.

सच बोलकर कोई, किसी को नाराज़ नहीं करता.


ना जाने क्यों कोसते हैं लोग बदसूरती को,

बर्बाद करने वाले तो हसीन चेहरे होते हैं.


बस यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ,

धूप कितनी भी तेज़ हो समन्दर नहीं सूखा करते.


बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मेँ अपने,

फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए.


अब जिस के जी में आये वही पाये रौशनी,

हम ने तो दिल जला कर सरेआम रख दिया.


तुझको भी जब अपनी कसमें अपने वादे याद नहीं,

हम भी अपने ख्वाब तेरी आँखों में रख कर भूल गए.


माँगने से मिल सकती नहीं हमें एक भी ख़ुशी,

पाये हैं लाख रंज तमन्ना किये बगैर.


दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं,

जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं.


उसकी मोहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब सिलसिला था,

अपना भी नहीं बनाया और किसी का होने भी नहीं दिया.


ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम अमीर,

सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है.


हम जानते तो इश्क़ न करते किसी के साथ,

ले जाते दिल को ख़ाक में इस आरज़ू के साथ.


दबे होंठों को बनाया है सहारा अपना,

सुना है कम बोलने से बहुत कुछ सुलझ जाता है.


समन्दर की स्याही बनाकर शुरू किया था लिखना

खत्म हो गई स्याही मगर माँ की तारीफ बाकी है.


तमाम नींदे गिरवी है उसके पास,

ज़रा सी मोहोब्बत ली थी जिससे.


हमें क्या पता था, मौसम ऐसे रो पड़ेगा,

हमने तो आसमां को बस अपनी दास्ताँ सुनाई थी.


मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर,
मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हें याद करते करते.


मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ ऐ खुदा,
किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे, जो मौत तक वफा करे.


यूँ तो शिकायते आप से सैंकड़ों हैं मगर,
आप एक मुस्कान ही काफी है मनाने के लिये.


तुम्हारा साथ तसल्ली से चाहिए मुझे,
जन्मों की थकान लम्हों में कहाँ उतरती है.


तेरी जगह आज भी कोई नहीं ले सकता,
पता नहीं वजह तेरी खूबी है या मेरी कमी.


ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है
तो मेरा लहू लेले, यू कहानिया अधूरी न लिखा कर.


इश्क़ है या कुछ और ये तो पता नहीं,
पर जो तुमसे है वो किसी और से नही.


तुम्हारी याद ऐसे महफूज़ है मेरे दिल मे,
जैसे किसी गरीब ने रकम रक्खी हो तिजोरी में.


तेरी यादों ने मुझे क्या खूब मशरूफ किया है ऐ सनम,
द से मुलाकात के लिए भी वक़्त मुकर्रर करना पड़ता है.


ना प्यार कम हुआ है ना ही प्यार का अहेसास,
बस उसके बिना जिन्दगी काटने की आदत हो गई है.


जिन्दगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा,
उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, हमसफ़र नहीं.


आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक,
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक.


ख्वाब मत बना मुझे, सच नहीं होते,
साया बना लो मुझे, साथ नहीं छोडेंगे.


मोहब्बत रोग है दिल का इसे दिल पे ही छोड़ दो,
दिमाग को अगर बचा लो तो भी गनीमत हो.


ज़िन्दगी ये चाहती है कि ख़ुदकुशी कर लूँ,
मैं इस इन्तज़ार में हूँ कि कोई हादसा हो जाए.


वो कहते हैं हम जी लेंगे खुशी से तुम्हारे बिना,
हमें डर है वो टूटकर बिखर जायेंगे हमारे बिना.


मैंने अपने ख्वाहिशो को दिवार में चुनवा दिया,
खामखाँ जिंदगी में अनारकली बनके नाच रही थी.


मरहम लगा सको तो गरीब के जख्मो पर लगा देना
हकीम बहुत है बाजार में अमीरो के इलाज खातिर.


सुनो ये बादल जब भी बरसता है,
मन तुझसे ही मिलने को तरसता है.


पहली बारिश का नशा ही कुछ अलग होता हैं,
पलको को छूते ही सीधा दिल पे असर होता हैं.


तुम दूर हो या पास फर्क किसे पड़ता है,
तू जँहा भी रहे तेरा दिल तो यँही रहता है.


तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे..
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे.


सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना..
कहीं कोई थक ना जाये तुम्हें एहसास दिलाते दिलाते.


लूट लेते हैं अपने ही,
वरना गैरों को क्या पता इस दिल की दीवार कमजोर कहाँ से है.


एक अज़ीब सा रिश्ता है मेरे और ख्वाहिशों के दरम्यां,
वो मुझे जीने नही देती, और मै उन्हे मरने नही देता.


तुमने समझा ही नहीं और ना समझना चाहा,
हम चाहते ही क्या थे तुमसे तुम्हारे सिवा.


रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है,
कि लोग झुकना पसंद नहीं करते.


इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है,
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर.


सिर्फ मोहब्बत ही ऐसा खेल है,
जो सिख जाता है वही हार जाता है.


इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग
दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग.


मौहब्बत की मिसाल में,बस इतना ही कहूँगा,
बेमिसाल सज़ा है,किसी बेगुनाह के लिए.


मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग,
पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे.


हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं,
क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.


ये लकीरें, ये नसीब, ये किस्मत सब फ़रेब के आईनें हैं,
हाथों में तेरा हाथ होने से ही मुकम्मल ज़िंदगी के मायने हैं.


क्यूँ हर बात में कोसते हो तुम लोग नसीब को,
क्या नसीब ने कहा था की मोहब्बत कर लो.


किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम
चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम.


तेरे करीब आकर बडी उलझन में हूँ,
मैं गैरों में हूँ या तेरे अपनो में हूँ.


जब जब काग़ज़ पर लिखा, मैंने माँ का नाम,
क़लम अदब से बोल उठी, हो गये चारों धाम.


कोई तो बरसात ऐसी हो जो तेरे संग बरसे ,
तन्हा तो मेरी आँखें हर रोज़ बरसती है.


महसूस खुद को तेरे बिना मैंने कभी किया नहीं।
तू क्या जाने लम्हा कोई मेने कभी जिया नहीं.


मिटातीं है किसी को, बनातीं है किसी को,
मोहोब्बतें भी आजकल की, सियासी हो गयीं हैं.


इत्तेफ़ाक़ से मिल जाते हो जब तुम राह में कभी,
युँ लगता है करीब से ज़िन्दगी जा रही हो जैस.


वो आज करती है नज़र अंदाज़ तो बुरा न मान,
टूट कर चाहने वालों को रुलाना रिवाज है इस दुनिया का.


इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है,
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर.


ढूँढ ही लेता है मुझे किसी ना किसी बहाने से दर्द
वाकिफ़ हो गया है मेरे हर ठिकाने से.

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Final Words

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